Varanasi उत्तर प्रदेश धर्म-कर्म 

अक्षय तृतीया 2021 : काशीपुराधिपति होंगे तर, बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में लगेगा जलधारी, यह है पौराणिक मान्यता

Varanasi : काशी नगरी और यहां के लोगों की बाबा विश्वनाथ के प्रति भक्ति भी एक अलग छाप छोड़ती हैं। काशी की जनता इस गर्मी और उमस से अपने सातग अपने बाबा को बचाने के लिए भी कई जतन करते है। इसीलिए प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी बाबा के गर्भगृह में जलधारी(फव्वारा) लगाया जाएगा।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तद्नुसार 14 मई को अक्षय तृतीया के मान विधान के तहत काशी विश्वनाथ दरबार में बाबा का जलधरी (फव्वारा) की फुहार से शीतल श्रृंगार किया जाएगा। बाबा के गर्भगृह में अरघे से ठीक ऊपर रजत जलधारी लगाया जाएगा। मंगला आरती से पहले इससे ही अभिषेक कर गर्भगृह तर किया जाएगा। 

यह फव्वारा प्रत्येक वर्ष अक्षय तृतीया से लेकर सावन माह के पूर्णिमा तक लगाया जाता है। इसमे से निरन्तर गंगाजल, गुलाबजल और इत्र बाबा के ऊपर गिरता रहता है जिससे बाबा औघड़ दानी तर रहते है। इसके साथ ही गर्भगृह के चारो तरफ खस के पर्दे लगाये जायेंगे, जिसे हर 15 मिनट पर जल से तरावट किया जाता है जिससे पूरा परिसर ठंडा रहता है।

खास यह कि इस बार गंगा जल सीधे इसमें आएगा। इसके लिए निर्माणाधीन कारिडोर की सुरक्षा में लगे पीएसी के जवानों ने पंप-पाइप लगाकर जलधरी का अस्थायी टंकी से कनेक्शन कर दिया है। पहले इसके लिया दो सेवादारों की ड्यूटी लगाई जाती थी जो रजत कलश में जल लाकर टंकी में भरते थे। 

पुराणों के अनुसार भगवान शिव की सीतलता बहुत प्रिय है इसलिए अक्षय तृतीया से बाबा विश्वनाथ के साथ -साथ काशी कई शिवालयों में जलधारी लगाने का महत्व है। ऐसी मान्यता है कि भक्त गण बाबा को प्रशन्न करने के लिए अक्षय तृतीया पर्व विधि-विधान से पूजन कर चांदी की रजत जलधारी बाबा के गर्भगृह में लगाते है। मंदिर के वैदिक शास्त्री के अनुसार जो भक्त निरन्तर ऐसा करते है उन्हें मृत्यु उपरांत शिव-लोक की प्राप्ति होती है।

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