Varanasi धर्म-कर्म 

छठ पर ग्रह नक्षत्रों का बन रहा शुभ योग, पूजन से सुख-शांति के साथ अभीष्ट की होगी प्राप्ति

Varanasi : भगवान भास्कर की उपासना का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ 18 नवंबर से आरंभ हो गया। कार्तिक शुक्लपक्ष की चतुर्थी से आरंभ होकर व्रत का समापन शुक्लपक्ष की सप्तमी 21 नवंबर को उदीयमान सूर्य के अर्घ्य से होगा। छठ पूजा पर इस बार ग्रह नक्षत्रों का बहुत ही शुभ योग निर्मित हो रहा है। इस योग में पूजन से सुख-शांति बनी रहेगी और अभीष्ट की प्राप्ति होगी।

ज्योतिषाचार्य पंडित लोकनाथ शास्त्री के मुताबिक, कार्तिक शुक्ल की चतुर्थी 17 नवंबर को अर्द्धरात्रि के पश्चात 1.18 बजे लग गया। 18 नवंबर को नहाय खाय से महापर्व आरंभ हो गया। खरना 19 नवंबर को होगा। 20 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया जाएगा वहीं 21 नवंबर को सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर पारण किया जाएगा। चार दिवसीय महापर्व पर सूर्यदेव के साथ माता षष्ठी देवी की भी पूजा-अर्चना का विधान है।

बताया कि, छठ पूजा की शुरुआत रवियोग से हो रही है। नहाय खाय रवियोग में हो रहा है। इसके साथ ही भगवान सूर्य को अर्घ्य द्विपुष्कर योग में दिया जाएगा। इस योग में पूजा करने से परिवार में सुख, शांति, धन-समृद्धि बनी रहती है। 

पंडित लोकनाथ शास्त्री ने बताया कि बुधवार को नहाय खाय के साथ लौकी की सब्जी, चने की दाल तथा हाथ की चक्की से पीसे हुए गेहूं के आटे की पूड़ियां ग्रहण किए जाने का विधान है। 19 नवंबर को शाम को स्नान के बाद नए चावल से बने गुड़ की खीर का प्रसाद ग्रहण किया जाएगा, वितरित भी किया जाएगा। डाला छठ व्रत का मुख्य प्रसाद ठेकुआ है। यह गेहूं का आटा, गुड़ और देशी घी से बनाया जाता है। प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर पकाया जाता है।

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