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कुंवर का विजय जुलूस निकला : रामनगर दुर्ग में शस्त्र पूजन, शाही सवारी निकली

Sanjay Pandey

Varanasi : श्रीराम के रावण पर विजय के उपलक्ष्य में कुंवर अनंत नारायण सिंह का शाही विजय जुलूस मंगलवार की शाम पूरे शाही और परंपरागत अंदाज में निकला।

जुलूस में सबसे आगे बनारस स्टेट का झंडा लेकर दुर्ग के मुसाहिब चल रहे थे। उनके पीछे डंका वादक घुड़सवार, घुड़सवार पुलिस का दल चल रहा था। इसके बाद कुंवर परंपरागत राजसी वेशभूषा में हाथी पर सवार होकर ठीक चार बजकर उन्नीस मिनट पर किले से बाहर निकले।

उनके बाहर निकलते ही किले के ऊपरी बुर्ज पर खड़े ताशा वादकों ने ताशा बजाया। कुंवर के बाहर निकलते ही दुर्ग के बाहर खड़े लोगों ने हर-हर महादेव के उद्घघोष के साथ उनका अभिवादन किया। कुंवर ने भी हाथ जोड़कर उनका अभिवादन स्वीकार किया।

इसी के साथ कुंवर का शाही काफिला लंका रामलीला मैदान के लिए चल पड़ा। लगभग तीन किलोमीटर के रास्ते में दोनों ओर खड़े लोग उनका अभिवादन करते रहे। बटाऊबीर पहुंचकर उन्होंने शमी वृक्ष का पूजन किया और शांति के प्रतीक कबूतर छोड़ें।

इसके बाद धीरे-धीरे उनका काफिला लंका पहुंचा। वहां पहुंचकर कुंवर ने रणभूमि की परिक्रमा की और दुर्ग में लौट आए। यहां दरबार हाल में दरबार लगाया गया, जहां दुर्ग के मुसाहिबों ने कुंवर को नजराना पेश किया।

मुसाहिबों ने रुमाल में एक रुपये का सिक्का और पान का बीड़ा रखकर कुंवर को पेश किया। इसके पूर्व अनंतनारायण दुर्ग के झंडा गेट पर दोपहर ढाई बजे शस्त्र पूजन पर बैठे। झंडा गेट पर आते ही पीएसी के जवानों ने कुंवर को सलामी दी। इसके अलावा दुर्ग के बैंड दल ने भी सलामी धुन बजाई।

ब्राह्मणों के दल ने पूरे विधि-विधान से पूजा संपन्न-संपन्न कराया। शस्त्र पूजा के बाद कुंवर ने दुर्ग में स्थित मां काली के अलावा अपने कुल देवी देवताओं के दर्शन-पूजन किए।

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