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Webinar: विश्वास जीतेगा कोरोना से जंग अभियान के तहत आयोजित हुई ऑनलाइन कार्यशाला

Varanasi: भारतीय काउंसलिंग साइकोलॉजी एसोसिएशन द्वारा प्रारंभ किए गए विश्वास जीतेगा कोरोना से जंग अभियान के तहत प्रत्येक रविवार को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा वेबीनार श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है। इस मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा वेबीनार श्रृंखला के पांचवें चरण में इस रविवार को “आरसीआई मानसिक स्वास्थ्य एक्ट तथा मनोवैज्ञानिक परामर्शन की भूमिका” विषय के बारे में जागरूक किया गया। मुख्य अतिथि और वक्ता प्रोफेसर प्रोमिला बतरा (संकाय अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान, महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक, हरियाणा, तथा भारतीय काउंसलिंग साइकोलॉजी एसोसिएशन की गवर्निंग बोर्ड मेंबर) ने अपने व्याख्यान में सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा इस समय जिस विषय पर हम चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं। वास्तव में उस विषय पर चर्चा बहुत पहले होनी चाहिए थी। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति मनोविज्ञान विषय से स्नातक और परास्नातक कर चुका होता है और वह परामर्शन के क्षेत्र में आना चाहता है तो उसके लिए “अस्मिता संकट” की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, क्योंकि बार-बार परामर्शक के आर.सी.आई. अप्रूव्ड होने की बात की जाती है। तो मैं आप सब को यह बताना चाहती हूं, कि आप सभी यदि परामर्शन के क्षेत्र में कार्य करना चाहते हैं तो बेहिचक करें, और स्वयं को इस सुंधा अस्मिता संकट से निनिकालें और यदि इस क्षेत्र में आप आप आगे बढ़ना चाहते हैं तो परामर्शन का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से प्रशिक्षण प्राप्त करें परामर्श से संबंधित कोई डिप्लोमा कोर्स करें, और इस क्षेत्र में कार्य करें।

भारतीय काउंसलिंग साइकोलॉजी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि मनोविज्ञान विषय से अपनी पढ़ाई स्नातक और परास्नातक स्तर तक पूरी कर चुके हैं वह गर्व से कहना शुरू करें कि हम मनोवैज्ञानिक है। परामर्शन करने के लिए आर.सी.आई. अप्रूव्ड होना जरूरी नहीं है। नैदानिक परामर्शन और मनोवैज्ञानिक परामर्शन में कोई अंतर नहीं है, मनोवैज्ञानिक परामर्शन में भी हम सारे वही कार्य करते हैं जो एक नैदानिक मनोवैज्ञानिक करता है। प्रतिभागियों को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय काउंसलिंग साइकोलॉजी एसोसिएशन का मुख्य उद्देश्य ही यह है कि हम परामर्शनके क्षेत्र में कार्य करने वाले मनोवैज्ञानिकों को अधिक से अधिक जागरूक करें और परामर्श के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। इस वेबीनार का संचालन डॉ राजेश भट्ट (असिस्टेंट प्रोफेसर-गेस्ट फैकेल्टी, मनोविज्ञान विभाग, एच.एन.बी., गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर, उत्तराखंड, नेशनल ऑर्गेनाइजेशनल सेक्रेटरी ऑफ भारतीय काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट) ने किया और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम हमेशा होते रहने चाहिए, जिससे कि हम सभी से संपर्क बनाए रखें, और लोग हम से जुड़े रहें,जिससे कि हम उनकी मदद कर सके। डॉ राजेश भट्ट ने प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न पूछे गए प्रश्नों को विशेषज्ञों तक पहुंचाया और उन्हें संतोषजनक उत्तर प्राप्त करवाने में मदद की। इस वेबीनार में लगभग 956 लोगों ने रजिस्ट्रेशन किया। लगभग 3000 लोगों ने फेसबुक के माध्यम से लाइव देखा और 390 प्रतिभागियों ने जूम एप की सहायता से शामिल होकर इसमें अपनी प्रतिभागीता दी। इस दौरान डॉ वेद प्रकाश रावत, डॉ स्निग्धा मिश्रा, डॉ चंद्र तेहरान, डॉ रेखा वाघनी, डॉ अनुपमा, डॉ अपूर्व कुमार पांडया, डॉ सुभाष मीणा, डॉ विभा रानी ने भी भाग लिया तथा इस विषय पर परिचर्चा की। विराली प्रकाश, मौसम प्रकाश की भी उपस्थिति रही।

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