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Webinar : कोविड-19 का प्रभाव सम्पूर्ण मानवता पर पड़ा- Prof. Gerise herndon

Varanasi : वसंत महिला महाविद्यालय (राजघाट), राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा कोविड-19 तथा भारतीय राजनीतिक परिदृश्य भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का पुनरपरीक्षण, विषयक पर 19 तारीख से दो दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में लगभग 18 महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों जिनमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, पांडिचेरी विश्वविद्यालय, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, हार्टफोर्डशायर विश्वविद्यालय, इंग्लैंड के प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

उद्घाटन समारोह में स्वागत वक्तव्य देते हुए प्रोफेसर अलका सिंह (प्राचार्य वसंत महिला महाविद्यालय) ने कहा कि कोविड-19 से सीखने की आवश्यकता है। संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि कोविड-19 राजनीतिक विज्ञान के चश्मे से देखने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि वर्तमान संकट ने मानव सुरक्षा को संकट में डाल अनेक चुनौतियां उत्पन्न की हैं, जिसके प्रकाश में नीतियों व प्राथमिकताओं पर पुनर चिंतन की आवश्यकता है।

प्रोफेसर Prof. Gerise herndon (निर्देशिका इंटरनेशनल स्टडीज प्रोग्राम, ब्रास्का विश्वविद्यालय, अमेरिका) ने अपने उद्घाटन संदेश इन दिस टुगेदर बियोंड अस एंड डैम में इस बात पर बल दिया कि कोविड-19 का प्रभाव संपूर्ण मानवता पर पड़ा है हालांकि कुछ वर्गों जैसे शरणार्थी, गरीब, प्रवासी, बुजुर्ग, और आश्रय हीन पर इसका प्रभाव अधिक कष्टकारी है, किंतु संकट की इस घड़ी में हमें अपने और पराए से परे एकजुटता के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी परिदृश्य में कोविड-19 के प्रभाव की सविस्तार चर्चा की।

प्रोफेसर ने इस बात पर बल दिया कि जहां एक ओर कोविड-19 ने सामाजिक दूरियां बढ़ाई हैं तो दूसरी और तकनीक के माध्यम से एक नया टेक्नोस्केप तैयार किया है जहां सीमाओं से परे बिना पासपोर्ट और वीजा के वैचारिक आदान-प्रदान किया जा सकता है। प्रोफेसर हरडन ने बुद्धिजीवियों तथा अकादमिक समुदाय के द्वारा कोविड-19 के अनुभवों के प्रलेखन को आवश्यक बताया क्योंकि इसके आधार पर हम भविष्य में अपनी व्यवस्थाओं का आकलन कर पाएंगे। फिर प्रोफेसर चंद्रकला पाडिया (पूर्व कुलपति महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर तथा पूर्व अध्यक्ष इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी शिमला) ने अपने वक्तव्य में आंकड़ों के माध्यम से विभिन्न वर्गों तथा किसान, प्रवासी, मजदूर ,असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों पर चर्चा की।

कहा, कोविड-19 कि यद्यपि सभी को प्रभावित किया है किंतु महिलाओं पर इसके विशेष प्रभाव को समझने की आवश्यकता है। प्रोफेसर पांड्या ने कहा कि इस महामारी ने भारतीय जन स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति का पटाक्षेप कर दिया है। अब आवश्यक हो गया है कि जन स्वास्थ्य व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए। अंत में उन्होंने कहा कि आज की स्थितियों में गांधी के स्वराज की अवधारणा कहीं ज्यादा प्रासंगिक हो गई है।

कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. पुनीत पाठक ने किया। संगोष्ठी में विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने राज्य की भूमिका, केंद्र राज्य संबंध के उभरते आयाम, रॉलिंग बैक डिबेट मानव सुरक्षा, भारत में जन स्वास्थ्य की चुनौतियां तथा वर्क फ्रॉम होम के लैंगिक पक्ष हो गया पर चर्चा की। डॉ. कमल नयन चौबे दयाल सिंह महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, डॉक्टर प्रीति चौधरी बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, डॉ. प्रीति शर्मा सेंट जेवियर्स कॉलेज जयपुर, डॉक्टर निर्मली गोस्वामी तेजपुर विश्वविद्यालय, अमिय कुमार दास तेजपुर विश्वविद्यालय, डॉक्टर दीपक पांडेय देहरादून विश्वविद्यालय, डॉक्टर आशिता पांडिचेरी विश्वविद्यालय आदि विभिन्न सत्रों में वक्ता रहे। कार्यक्रम के संचालन में आयोजन सचिवों डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. पुनीता पाठक तथा डॉक्टर मनीषा मिश्र की सक्रिय सहभागिता रही।

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