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Webinar : साहित्य मनुष्यों को नूतन ऊर्जा व स्फूर्ति देता है- एसएन दुबे

Varanasi : वसंत महिला महाविद्यालय अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला के दूसरे दिन दो सत्र का आयोजन किया गया। पहले विशेष सत्र का संचालन परास्नातक की छात्राओं अलिशा मोहंती और वर्तिका गिरी ने किया। सत्र के प्रथम वक्ता महाविद्यालय के प्रबंधक एस.एन. दुबे ने कहा की साहित्य हमें कठिनाइयों दुखो और विषम परिस्थितियों से जूझने की शक्ति देता है। साथ ही साहित्य मनुष्यों को नूतन ऊर्जा व स्फूर्ति देता है, जो की किसी भी दौर में जीने के लिए अतीयवश्यक है। मुख्य वक्ता के रूप मे प्रोफेसर रजनीश धवन (यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रेजर वैलीं कनाडा) ने क्लासिकल साहित्य में महामारी इलीयड से महाभारत तक नामक विषय पर विस्तृत रूप से चर्चा की। उन्होंने बताया, महामारी का स्वरूप चाहे वह आज के संदर्भ में हो वह हमेशा प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करने से होता है। उन्होंने ग्रीक लेखकों जैसे होमेर, सोफोकलेसव एस्कालिस आदि की रचनाओं की चर्चा की। उन्होंने महाभारत की चर्चा की जिसमें बताया, कैसे त्रेता युग के खत्म व कलियुग के शुरू होने के पहले एक भीषण अकाल व महामारी आयी थी। उन्होंने यह भी कहा की आज की परिस्थिति को समझने के लिए यें रचनाएं हमें पर्याप्त दृष्टि देती हैं। इस सत्र के वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर अल्का सिंह ने किया।

द्वितीय सत्र को संबोधित करते हुए प्रोफेसर नीरजा ए गुप्ता (प्राचार्या-भवन कला व वाणिज्य महाविद्यालय, खानपूर) ने सांपों का देश और प्रदूषण का विचार सामाजिक स्थानीय महामारी के अगुआ के रूप मे नागलोक के किंवदंतियों का अध्ययन नामक विषय पर अपने गहन विचार रखे। उन्होंने अपनी बात भगवान कृष्ण व कालिया नाग के बीच के संघर्ष की कहानी के माध्यम से की और कहा की शुचिता, शुद्धता व एकागचितता से किसी भी महामारी से निजात पायी जा सकती है। सत्र की दूसरी वक्ता डॉ. रेखा सेठी (असोसीएट प्रोफेसर, इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय) ने कविताओं के माध्यम से लॉकडाउन में लड़कियों की जिंदगी व छोटी छोटी आशाओं, कोरोंना में करुणा की भावना, और प्रवासी मजदूरों की स्थिति गंगा नदी के माध्यम से अपनी बात कही। कार्यशाला में शामिल हुए प्रतिभागियों ने अपनी मूल रचनाओं के माध्यम से महामारी के वैविध्य रूपों पर अपने विचर रखे। प्रियंका चौहान ने लॉकडाउन की छप्पनवी रात, नम्रता जैसवाल ने विचारशील रात्रि, फातिमा अंसारी ने फरिश्ते व कोरोना योद्धान और अंकिता चौधरी ने कोविड-19 जैसी रचनाओं से कार्यशाला को सफल बनाया। डॉ. मंजरी झुनझुनवाला ने इस सत्र के वक्ताओं, अतिथियों व प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यशाला में 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम मे अंग्रेजी साहित्य के शिक्षक डॉ. मंजरी झुनझुवाला, डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. रचना पांडेय, डॉ. सुनीता आर्य, डॉ. मंजरी शुक्ला व प्रियंका चक्रवर्ती ने भाग लेकर द्वितीय दिवस के सत्रों को सफल बनाया।

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