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विश्वप्रसिद्ध रामलीला : बाली मारा गया, सुग्रीव का राजतिलक, सम्पाती ने मां सीता का पता बताया, जामवंत के बल याद दिलाने पर हनुमानजी ने पर्वतकार होकर गर्जन किया

sanjay Pandey

Varanasi : रामनगर की रामलीला के अठरहवें दिन रामलीला का मंचन किया गया। सोमवार को बाली वध, सुग्रीव का राजतिलक, अंगद को युवराज पद व वर्षा वर्णन की लीला संपन्न होती है। लीला के प्रथम चरण में श्रीराम का बल पाकर सुग्रीव अपने भाई बाली को युद्ध के लिए ललकारते हैं, बाली अपने पत्नी के मना करने के बावजूद युद्ध भूमि में जाता है। बाली सुग्रीव की लड़ाई में सुग्रीव बाली की प्रहार से घायल हो प्रभु श्रीराम की शरण में जातें है। युद्ध के दौरान ही श्रीराम एक वृक्ष की ओट लेकर बाण से बाली का वध करते हैं।

श्रीराम बाली की पत्नी तारा का करुण-क्रंदन सुन उन्हें ज्ञान प्रदान कर सारी माया हर लेते हैं। सभी बाली का अंतिम संस्कार करते हैं। श्रीराम प्रवर्षण पर्वत पर वर्षा काल के बादलों को बरसते देख लक्ष्मण से वर्षा का सजीव वर्णन करते हैं। आक्रोश जताते हुए श्रीराम लक्ष्मण को सुग्रीव को बुलाने की आज्ञा देते हैं। हनुमान भी सुग्रीव को समझाते हैं। सुग्रीव टालने के अंदाज में वानर सेना को सीता को खोजने के लिए भेजते हैं। सुग्रीव की बात सुनते ही लक्ष्मण क्रोधित हो उठते हैं। लक्ष्मणजी के क्रोध को शांत करते हुए युवराज अंगद सभी को लेकर श्रीराम की शरण में जाते हैं।

वहां सभी को अलग-अलग दिशाओं में भेजा जाता है। हनुमान को बुलाकर श्रीराम उन्हें एक अंगूठी देते हैं। मां सीता को खोजते हुए हनुमान व वानर सेना एक गुफा के पास पहुंचते हैं। जहां गंधर्व पुत्री स्वयंप्रभा से उनकी भेंट होती है। वही वानर सेना को समुद्र तट के पास पहुंचाती हैं। सीता का पता न चलने पर वानर सेना समुद्र तट पर दुखी हो बैठती है, तभी गिद्धराज सम्पाती वानरसेना को देख प्रसन्नता व्यक्त करते हैं, लेकिन अंगद की मुख से रावण द्वारा सीता हरण, जटायु वध व अन्य बाते सुन दुखी हो जाते हैं।

सम्पाती अपने गिद्धदृष्टि से देख उन्हें सीता के अशोक वाटिका में रहने की बात बताते हैं। विशाल समुद्र को देख इसे कैसे पार करेंगे यह सोच में पड़ गए तभी जामवंत के याद दिलाने पर हनुमान पर्वतकार हो गर्जन करते हैं। जामवंत उन्हें सिर्फ सीता का पता लगाकर आने की बात कहकर लंका भेजते हैं। इसी पर आरती के बाद लीला को विश्राम दिया जाता है।

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