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विश्वप्रसिद्ध रामलीला : प्रभु श्रीराम और हनुमानजी का मिलन, सुग्रीव से मित्रता, भगवान ने जटायु को अपने हाथों से दिया मोक्ष, एक ही तीर में ताड़ के सात वृक्षों को गिराए

Sanjay Pandey

Varanasi : श्रीराम को क्या पता था कि वन में सीता गुम हो जाएंगी। उनके खोने का इतना दुख हुआ श्रीराम को कि वन में रोते बिलखते लोगों से सीता के बारे में पूछते फिरे।

पशु- पक्षियों से लगायत पेड़ पौधों तक से सीता के बारे में पूछने लगे। सीता की खोज की राह में उन्हें घायल जटायु मिले। उन्होंने राम को बताया कि लंका का राजा रावण उनको हर कर दक्षिण दिशा की ओर ले गया है।

राम घायल जटायु की अपने हाथों से अंत्येष्टि करके उसे मोक्ष प्रदान करने के बाद आगे चलते हैं। उनको सबरी का आश्रम मिला।

वन की शोभा को देखकर राम अपने भाई लक्ष्मण से उसकी शोभा का वर्णन करते हैं। वह पम्पासर सरोवर पहुंचकर स्नान करके शीतल छाया में विश्राम करते हैं। उसी समय नारद जी वहां पहुंचकर उनसे भक्तों के हृदय में सदैव बसने का वर मांगते हैं।

राम उनको वर देने के बाद श्रृष्यमूक पर्वत के समीप पहुंचे तो उनकी मनकी बात जानने के लिए सुग्रीव ने हनुमान जी को भेजा। उनके बारे में जानकर हनुमान अपने असली रूप में आकर उनका चरण पकड़ लेते हैं।

राम उनको अपने हृदय से लगा लेते हैं। हनुमान उनको लेकर सुग्रीव के पास पहुंचे। परिचय होने के बाद राम से सीता के हरण की बात सुनकर सुग्रीव ने सीताजी द्वारा आकाश मार्ग से जाते समय फेंका गया वस्त्र दिया तो उसे देखकर राम विलाप करने लगे। उन्होंने सुग्रीव से वन में रहने का कारण पूछा।

सुग्रीव के बताने पर रामने बालि को एक ही बाण से मारने का विश्वास दिलाया। मगर बाली के बल के आगे सुग्रीव को राम के बल का विश्वास नहीं हुआ।

उन्होंने अपना संदेह दूर करने के लिए राम से एक ही तीर में ताड़ के सात वृक्षों को गिराने को कहा। श्रीराम एक तीर से सात पेड़ गिरा देते हैं। सुग्रीव का संदेह दूर हो जाता है। यहीं पर आरती के साथ लीला समाप्त हुई।

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