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विश्वप्रसिद्ध रामलीला : रावण रणभूमि में पहुंचा, बेहोश होकर लंका लौटा

निकलने से पहले अपशगुन को नजरअंदाज किया

बोला- मैंने अपने बल पर बैर बढ़ाया है, जवाब भी मैं स्वयं दूंगा

Sanjay Pandey

Varanasi : राम और रावण में छिड़ गया युद्ध। युद्ध में सब कुछ गंवाने के बाद अंत में स्वयं युद्ध करने रावण चल पड़ा। वह अपनी सेना के जीवित बचे सैनिकों से कहता है कि लड़ाई से जिसका मन हट गया हो वह अभी से भाग जाए।

लड़ाई के मैदान से भागने में भलाई नहीं है। मैंने अपनी भुजाओं के बल पर बैर को बढ़ाया है। इसका जवाब भी मैं स्वयं दूंगा। वह अस्त्र-शस्त्र, रथ आदि लेकर रणभूमि के लिए चलता है तो उसके सामने अपशकुन होने लगता है। वह उसको नजरअंदाज करके अहंकार के वशीभूत होकर चलता जाता है।

उसको सेना के साथ आते देखकर वानर सेना दौड़ती है। दोनों सेनाओं के साथ ही राम और रावण के बीच युद्ध होने लगा। राम को पैदल युद्ध करते देख राम पर विभीषण को संदेश देते हैं। वह राम से कहते हैं कि आप कैसे विजय प्राप्त करेंगे।

तब राम उनसे कहते हैं कि सुरता और धैर्य जिस रथ के पहिए हैं, सत्य शील और दृढ़ता जिसके ध्वजा पताका हैं, ज्ञान जिसका बल और इंद्रियों को जीतना तथा परोपकार रथ के घोड़े हैं जो क्षमा और दया रूपी रस्सी से जुड़े रहते हैं और ईश्वर का भजन उस रथ का चतुर्थ सारथी हैं, बैराग्य रूपी ढाल, संतोष रूपी तलवार, दान रूपी फरसा और बुद्धि रूपी धनुष हों, संयम और नियम ही जहां अनेकों प्रकार के बाल हैं, निर्मल और अचल मन तरकस है और ब्राह्मणों के चरण का पूजन कवच हैं इसी उपाय से विजय प्राप्त करूंगा। यह सुनकर विभीषण का संदेह दूर हो गया।

और विभीषण राम के चरण पर गिर पड़े। रावण की मार से वानर भालू व्याकुल हो उठे। यह देखकर लक्ष्मण को क्रोध आ गया और वे रावण से लड़ने के लिए चल पड़े। उनको देखकर रावण कहता है कि तूने मेरे पुत्र का नाश किया है।

आज तुझे मार कर अपनी छाती ठंडी करूंगा। वह लक्ष्मण पर बाणों की वर्षा करता है जिसे लक्ष्मण काट देते हैं। वे अपने बाण से उसके रथ को काट देते हैं, रावण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ा। मूर्छा हटने पर व लक्ष्मण पर ब्रह्मा की दी हुई प्रचंड शक्ति का प्रयोग करता है।

जिससे वह विकल होकर गिर पड़े। रावण उन्हें उठाने लगा लेकिन वह नहीं उठे। यह देखकर हनुमान दौड़ पड़े तो रावण ने उनकी छाती पर एक घुसा मारा वह घुटनों के बल पर रुक गए और संभल कर उसे एक घुसा मारा तो वह मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ा। मूर्छा हटने पर हनुमान के बल की प्रशंसा करता है।

राम के कहने पर भाई अपने हृदय में ऐसा समझो कि तुम देवताओं की रक्षा करने वाले और काल को भी खाने वाले हो यह सुनकर लक्ष्मण खड़े हो गए। उन्होंने रावण के रथ को तोड़ दिया।

सारथी दूसरे रथ में घायल रावण को डालकर उसको लंका ले गया, वहां होश में आने पर वह यज्ञ करने लगा, यहीं पर भगवान की आरती के बाद नीला को विराम दिया गया।

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