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मजदूरों के बच्चों के शिक्षा का खर्च उठाएगी योगी सरकार, 18 हजार बच्चों को घर-घर जाकर किताबें देने का BSA ने दिया निर्देश

Varanasi : सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे क्लास एक से आठ तक के बच्चों को शीघ्र ही किताबें उनके घर पर ही मिलेंगी। खास बात यह कि किताबें बच्चों को उनके स्कूल के शिक्षक ही उनके घर पहुचायेंगे। साथ ही गैर राज्यों से सपरिवार अपने घर वापस आ चुके प्रवासी मजदूरों के बच्चों को शिक्षा विभाग योगी सरकार के पहल पर निशुल्क शिक्षा भी देगी।

इसके लिए शिक्षक गांवों में घर-घर जाकर नामांकन भी करेंगे।यह जानकारी विद्यापीठ ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी बृजेश राय ने गुरुवार को खास बातचीत में दी। बृजेश राय ने बताया कि किताबों के साथ शिक्षक पुराने क्लास का अंकपत्र भी बच्चों को उनके घर पर ही सौपेंगे। खण्ड शिक्षा अधिकारी बृजेश राय के अनुसार विद्यापीठ ब्लॉक के 105 सरकारी स्कूलों में क्लास एक से आठ तक में लगभग 18 हजार बच्चे पढ़ते हैं। कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन में बच्चों को किताबें नहीं मिल पाई है।

बताया जाता है कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में किताबें आनी शुरू हो गई है। इन किताबों को बांटने की जवाबदेही संबंधित स्कूलों के शिक्षकों को ही निभानी होगी। लॉकडाउन में स्कूल बंद है। ऐसे में स्कूल खोलकर बच्चों को किताब बांटना कहीं से भी उचित नहीं होगा। उनके घर जाकर किताब देनी होगी। हालांकि अभी पूरी तरह से यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि शिक्षकों को कौन सा फॉर्मूला अपनाकर किताब बांटना पड़ेगा। जिला स्तर पर भी कोई स्पष्ट आदेश जारी होता है या फिर अपने सुविधा के अनुसार शिक्षक किताब बाटेंगे इसे लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है। जिले के कई शिक्षक कोरोना महामारी में मडुवाडीह,कैंट समेत सभी प्रमुख स्टेशन व अन्य जगहों पर ड्यूटी बजा रहे हैं। ऐसे में जो शिक्षक स्कूल में बच गए हैं उन्हें ही इस कार्य को निपटाना होगा।

बृजेश राय ने बताया कि 20 फीसदी प्रवासी बच्चे स्कूल ही नहीं जा पाते हैं। ऐसे बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। लिहाजा, प्रवासी बच्चों को शिक्षा मुहैया करवाने के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में स्थानीय लोगों के बच्चों की संख्या बढ़ाने पर भी शिक्षा विभाग को जोर दे रही है।

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