झूठ बोले कौवा काटे: और झूठ भी ऐसे कि सत्य खुद ही आकर कहे, भाई, तू ही सही है, मैं तो झूठा हूं
व्यंग्य झूठ बोलना आजकल एक ऐसी कला हो गई है, जिसमें लोग बिना किसी प्रशिक्षण के महारथ हासिल कर लेते हैं। बचपन में हम सबने वो कहावत सुनी थी- “झूठ बोले कौवा काटे” लेकिन अब सवाल उठता है कि आखिर कौवे ने कब, किसे और कहां काटा? आज के दौर में तो कौवे शायद खुद भी सोच रहे होंगे कि किस-किस को काटें? आखिर इतने सारे झूठों के बीच उनका भी धैर्य जवाब दे गया होगा। पहले जमाने में जब कोई झूठ बोलता था, तो चेहरे पर हल्की शर्म, और…
Read More