शेरो-शायरी: अदब की महफिलों का चिराग, दिलों के जज़्बात को लफ्ज़ों में पिरोकर सुनने वाले को अपने जादू में बांधना इसे कहते हैं
नई दिल्ली: शेरो-शायरी, जो भारतीय अदब का एक अहम हिस्सा है, दिलों के जज़्बात को लफ्ज़ों में पिरोकर सुनने वाले को अपने जादू में बांध लेती है। चाहे ग़म हो या ख़ुशी, इश्क़ हो या तन्हाई, हर एहसास का शेरो-शायरी में अनोखा अंदाज देखने को मिलता है। उर्दू अदब की यह परंपरा आज भी महफिलों और कवि सम्मेलनों की रौनक बनकर जिंदा है। ग़ज़ल: शेरो-शायरी का खूबसूरत रूप ग़ज़ल, शेरो-शायरी का वह रूप है जो इश्क़ और तन्हाई के एहसास को गहराई से बयां करता है। मिर्ज़ा ग़ालिब, मीर तकी…
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