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शारदीय नवरात्रि 2024: तृतीया को होती है मां चंद्रघंटा की उपासना, आसुरी शक्तियों से रक्षा करती हैं माता, जानिए पूजन विधि

पंडित लोकनाथ शास्त्री नवरात्रि की तृतीया को होती है देवी चंद्रघंटा की उपासना। मां चंद्रघंटा का रूप बहुत ही सौम्य है। मां को सुगंधप्रिय है। उनका वाहन सिंह है। उनके दस हाथ हैं। हर हाथ में अलग-अलग शस्त्र हैं। वे आसुरी शक्तियों से रक्षा करती हैं। मां चंद्रघंटा की आराधना करने वालों का अहंकार नष्ट होता है। उनको सौभाग्य, शांति और वैभव की प्राप्ति होती है। मां चंद्रघंटा का उपासना मंत्र- पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादे तनुते मां चंद्रघण्टेति विश्रुता।। महामंत्र – ‘या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नसस्तस्यै नमस्तस्यै…

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शारदीय नवरात्र का प्रथम दिन: मां शैलपुत्री के दरबार में भक्तों का तांता, आशीर्वाद की प्राप्ति

वाराणसी: आज शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री के दरबार में भक्तों ने पूरे श्रद्धा भाव से हाजिरी लगाई और अपनी आस्था प्रकट की। वाराणसी के अलईपुर स्थित शैलपुत्री देवी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां उन्होंने माता को नारियल और चुनरी अर्पित कर जयकारे लगाए और आशीर्वाद मांगा। मंदिर की कथा और महत्व शैलपुत्री देवी के इस धाम के बारे में मान्यता है कि माता गौरा, महादेव के साथ आनंद कानन का भ्रमण कर रही थीं। जब माता को यह स्थान अत्यधिक प्रिय लगा, तो उन्होंने…

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शारदीय नवरात्रि 2024: दूसरे दिन होती है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, आइए जानते हैं इस दिन की खास बातें

पंडित लोकनाथ शास्त्री नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान और तप की देवी कहा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी ने ही भगवान शिव को पति रूप प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। आइए जानते हैं इस दिन की खास बातें…. नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के ‘देवी ब्रह्मचारिणी’ रूप की पूजा करने का विधान है। मां ब्रह्मचारिणी के दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमण्डल है। शास्त्रों में बताया गया है कि मां दुर्गा…

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भगवती को सबसे प्रिय है सफेद हलवा का भोग: नवरात्रि में विशेष महत्व, इन चीजों को भी भोगों के रूप में कर सकते हैं अर्पित कर सकते हैं

नवरात्रि के दौरान देवी भगवती के पूजन में विभिन्न प्रकार के भोग लगाए जाते हैं, लेकिन सफेद हलवा देवी को सबसे प्रिय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सफेद हलवा न केवल देवी को अत्यंत प्रिय है, बल्कि इससे भक्तों को उनके आशीर्वाद की प्राप्ति भी होती है। इस प्रसाद का विशेष महत्व है क्योंकि सफेद रंग को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है, जो देवी के स्वरूप को दर्शाता है। सफेद हलवा का आध्यात्मिक महत्व पौराणिक कथाओं के अनुसार, सफेद हलवे का भोग देवी को शीतलता…

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नवरात्र में खानपान को लेकर सजग रहें: इन बातों का रखें ध्यान, गलती पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली: नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है और देशभर में माता के भक्त उपवास और विशेष खानपान के नियमों का पालन कर रहे हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पवित्र पर्व के दौरान व्रत रखने वालों को अपने खानपान में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है ताकि स्वास्थ्य सही रहे और ऊर्जा भी बनी रहे। गलत खानपान से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं, इसलिए इन दिनों भोजन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इन बातों का रखें ध्यान: सजग रहें, स्वस्थ…

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रामनगर की रामलीला: सूपर्णखा की नाक कटी, नियति ने रावण का अंत तय किया, नवग्रह के आजाद होने का समय नजदीक

वाराणसी, रामनगर: रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला में जब श्रीराम और रावण का महायुद्ध पास आता है, तो उसकी पटकथा सूपर्णखा की कटी नाक से लिखी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, यह घटना राक्षसों के विनाश और अधर्म के अंत का प्रारंभ है। सूपर्णखा, रावण की बहन, श्रीराम और लक्ष्मण को देखकर उन पर मोहित हो जाती है और राम से विवाह का प्रस्ताव रखती है। श्रीराम उसे लक्ष्मण के पास भेज देते हैं, लेकिन लक्ष्मण भी उसे अस्वीकार कर देते हैं। कई बार ठुकराए जाने के बाद, सूपर्णखा…

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शारदीय नवरात्र 2024: पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना, मां की पूजा करने वाला संपूर्ण सृष्टि संचालित कर सकता है

पंडित लोकनाथ शास्त्री वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती के स्वरूप में साक्षात शैलपुत्री की पूजा देवी के मंडपों में पहले नवरात्र के दिन होती है। शैलपुत्री अपने अस्त्र त्रिशूल की भांति हमारे त्रीलक्ष्य (धर्म, अर्थ और मोक्ष) के साथ मनुष्य के मूलाधार चक्र पर सक्रिय बल है। मूलाधार में पूर्व जन्मों के कर्म और समस्त अच्छे-बुरे अनुभव संचित रहते हैं। यह चक्र कर्म सिद्धांत के अनुसार यह चक्र प्राणी का प्रारब्ध निर्धारित करता है, जो अनुत्रिक के आधार में स्थित तंत्र और योग…

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शारदीय नवरात्रि 2024: पढ़िए देवी सती की पौराणिक कथा, जानिए 52 शक्ति पीठ कहां-कहां हैं, वाराणसी से श्रीलंका तक होती है भगवती की पूजा

पंडित लोकनाथ शास्त्री पौराणिक कथा के अनुसार, माँ सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति ने कनखल (हरिद्वार) में बृहस्पति सर्व नामक यज्ञ का आयोजन किया था। इस अवसर पर उन्होंने सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा था। लेकिन उन्होंने अपनी पुत्री सती और अपने दामाद शंकर जी को नहीं बुलाया था। लेकिन माँ सती शिव जी के लाख मना करने बाद बिन बुलाये अपने पिता के घर इस आयोजन के निमित्त आ गईं। जब माँ सती ने अपने पति दक्ष से यह पूछा कि आपने सभी को इस यज्ञ के लिए…

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आश्विन अमावस्या: काशी में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, पूर्वजों के लिए किया पिंडदान और तर्पण

वाराणसी: आश्विन मास की अमावस्या पर बुधवार को काशी के गंगा घाटों, कुंडों और तालाबों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। हजारों लोगों ने पितरों के मोक्ष के लिए पिंडदान, श्राद्धकर्म और तर्पण किया। खासतौर पर पिशाचमोचन कुंड पर बड़ी संख्या में लोग पितृ तर्पण के लिए जुटे, जहां मान्यता है कि श्राद्धकर्म से पूर्वजों को शांति मिलती है। इस विशेष दिन पर पिंडदान कर ब्राह्मणों को भोजन कराने की परंपरा निभाई गई। पितरों की शांति के लिए किया गया पिंडदान पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का दिन पितरों…

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पितृपक्ष में तर्पण और पिंडदान का महत्व: पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का प्रतीक, पूर्वज हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा

शंकरनाथ पांडेय वाराणसी: पितृपक्ष हिंदू धर्म का एक विशेष समय है, जो श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। इस अवधि में तर्पण, पिंडदान और अन्य दान करना अत्यधिक पुण्यकारी माना जाता है। इस वर्ष पितृपक्ष की अवधि के दौरान लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान किया, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अनूठा उदाहरण सामने आता है। तर्पण और पिंडदान का महत्व हिंदू धर्म के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों…

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