उत्तर प्रदेश धर्म-कर्म पूर्वांचल वाराणसी सबसे अलग 

Yogi सरकार का दिव्य संकल्प: काशी के घाटों पर 12 लाख दीपों से सजेगी देव दीपावली, होगा अद्वितीय आयोजन

वाराणसी: काशी की पावन धरती पर इस साल 15 नवंबर को होने वाली देव दीपावली अद्वितीय और अलौकिक रूप से मनाई जाएगी। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस पवित्र अवसर को भव्य और दिव्य बनाने के लिए 12 लाख दीपों से घाटों और कुंडों को सजाने का संकल्प लिया है। इस बार विशेष बात यह है कि लाखों दीप गाय के गोबर से बनाए गए होंगे, जिससे पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक धरोहर को सहेजने का संदेश भी दिया जाएगा। देवताओं की धरती पर दिव्य रोशनी का नजारा 15 नवंबर…

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पितृपक्ष में लहसुन-प्याज: क्या खाना उचित है? जानिए धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक पहलू

पितृपक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक विशेष समय होता है जब लोग अपने पितरों (पूर्वजों) को श्रद्धांजलि देते हैं। यह 15 दिनों की अवधि में होता है, जिसमें तर्पण, पिंडदान और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। इस दौरान कुछ धार्मिक नियमों का पालन किया जाता है, जिनमें लहसुन और प्याज जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन न करने की भी सलाह दी जाती है। इस विषय पर धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोणों से विचार करना जरूरी है। धार्मिक दृष्टिकोण पितृपक्ष में लहसुन और…

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महाप्रसाद की गुणवत्ता परखी: डिप्टी कलेक्टर ने चेक किया, सामग्री, प्रक्रिया और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश

वाराणसी: तिरुपति में प्रसाद में मिलावट की घटना सामने आने के बाद श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शनार्थियों को वितरित किए जाने वाले महाप्रसादाम के लड्डू की सामग्री की जांच डिप्टी कलेक्टर शंभू शरण ने की। उन्होंने मौके जाकर प्रसाद बनाने के स्थान का गहन निरीक्षण किया और सभी सामग्रियों की गुणवत्ता की बारीकी से जांच की। प्रसाद बनाने वाले को यह निर्देश दिया गया कि वे सामग्री, प्रक्रिया और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। इस दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होती…

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पितृपक्ष में तेल, साबुन का प्रयोग: संयम, साधना पर जोर, जानिए परंपरा और मान्यताएं

पितृपक्ष हिन्दू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और तर्पण का विशेष समय होता है। इस दौरान अनेक नियमों का पालन करने की परंपरा है, जिनमें तेल और साबुन का प्रयोग भी एक महत्वपूर्ण विषय है। पितृपक्ष के दौरान कई परिवारों में यह मान्यता है कि इस समय शरीर पर तेल और साबुन का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसके पीछे धार्मिक मान्यता यह है कि पितृपक्ष में शरीर और मन को पवित्र रखते हुए पूर्वजों का स्मरण और उनकी आत्मा की शांति के लिए कर्मकांड किए जाते हैं। ऐसे…

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पितृपक्ष में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज: इस तरह की गलती भी मत करिएगा, धर्म और स्वास्थ्य का ध्यान रखें

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) का विशेष महत्व है, जो 16 दिनों तक चलता है। इस दौरान लोग अपने पितरों को तर्पण, श्राद्ध और पूजा-पाठ के माध्यम से श्रद्धांजलि देते हैं। साथ ही, इस अवधि में खान-पान से जुड़ी कुछ खास परंपराएं और नियम होते हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता है। पितृपक्ष के समय में कुछ खाद्य पदार्थों को खाने से परहेज किया जाता है, जबकि कुछ को विशेष रूप से ग्रहण किया जाता है। आइए जानते हैं इस दौरान क्या खाएं और किन चीजों…

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पितृपक्ष में पिंडदान: पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और मोक्ष का मार्ग, वाराणसी और गया का विशेष महत्व

वाराणसी: पितृपक्ष हिन्दू धर्म का एक विशेष समय होता है, जब पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया जाता है। यह अवधि भाद्रपद पूर्णिमा से अश्विन अमावस्या तक, कुल 16 दिनों तक होती है, जिसे श्राद्ध पक्ष या महालय पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। पिंडदान का महत्व: हिन्दू धर्म में मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान, हमारे पूर्वजों की आत्माएं धरती पर आती हैं और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। पिंडदान, जिसमें चावल,…

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गिरिजा माता मंदिर: भव्य पुनर्निर्माण कराया गया, विश्वकर्मा पूजा का आयोजन

वाराणसी: भगवान श्री विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर 36वीं वाहिनी पीएसी, रामनगर में गिरिजा माता मंदिर के प्रांगण में पत्थर लगाने, तालाब सौंदर्यीकरण और पुजारी के जर्जर आवास के जीणोद्धार का कार्य सम्पन्न हुआ। सेनानायक डॉ. अनिल कुमार पाण्डेय (आईपीएस) और उनकी धर्मपत्नी ने इस आयोजन में मुख्य भूमिका निभाई। पूजा, हवन और आरती के बाद नवनिर्मित हिस्से का उद्घाटन किया गया। इस दिन सेनानायक का जन्मदिन भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। केक काटने और कर्मचारियों द्वारा शुभकामनाएं देने के साथ, भगवान सिंह यादव, सूबेदार मेजर को उनके उत्कृष्ट…

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150 साल पुरानी परंपरा: महादेव की नगरी काशी में निकली लाट भैरव की भव्य बारात

वाराणसी: महादेव की नगरी में मंगलवार को 150 साल पुरानी परंपरा के तहत बाबा लाट भैरव की भव्य बारात निकाली गई। इस ऐतिहासिक अवसर पर काशी के विभिन्न वर्गों के लोग अपनी आस्था और श्रद्धा के साथ शामिल हुए। बारात की शुरुआत विश्वेश्वरगंज इन्ना माई की गली से हुई, जहाँ पर डमरू दल की थाप ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। बारात की शुरुआत से पहले, लाट भैरव प्रबंध समिति ने बाबा की झांकी को वस्त्राभूषण और फूल-माला से सजाया। रजत मुखौटा घोड़े के रथ पर रखा गया और आरती…

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वास्तु शास्त्र के अनुसार फटाफट सफलता पाने के टिप्स: क्या करें और क्या न करें, त्वरित सफलता के लिए ये आजमाएं

वास्तु के अनुसार त्वरित सफलता के लिए टिप्स नई दिल्ली: फटाफट सफलता पाने के लिए लोग कई उपाय करते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार सही दिशा और नियमों का पालन करने से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। आइए जानें वास्तु शास्त्र के अनुसार सफलता पाने के टिप्स: इन वास्तु शास्त्र के नियमों को अपनाकर आप अपनी सफलता की राह को आसान और तेजी से प्राप्त कर सकते हैं। वास्तु के अनुसार सही दिशा और वातावरण में बदलाव लाकर सकारात्मक परिणाम प्राप्त करना संभव है।

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पितृपक्ष 2024: आशीर्वाद की बौछार और अशुभ कार्यों से बचाव की सलाह, इन चीजों को अच्छे से समझ लें

नई दिल्ली: पितृपक्ष का समय पितरों को सम्मान देने और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का अवसर है। इस विशेष समय में कुछ कार्य शुभ माने जाते हैं, जबकि कुछ कार्य अशुभ माने जाते हैं। पितृपक्ष में शुभ कार्य पितृपक्ष में अशुभ कार्य पितृपक्ष एक महत्वपूर्ण अवसर है जब हम अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट कर सकते हैं और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को समृद्ध बना सकते हैं। इस समय शुभ कार्यों को अपनाकर और अशुभ कार्यों से बचकर हम अपने और अपने परिवार के लिए सकारात्मक ऊर्जा…

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