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शारदीय नवरात्र 2024: पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना, मां की पूजा करने वाला संपूर्ण सृष्टि संचालित कर सकता है

पंडित लोकनाथ शास्त्री वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती के स्वरूप में साक्षात शैलपुत्री की पूजा देवी के मंडपों में पहले नवरात्र के दिन होती है। शैलपुत्री अपने अस्त्र त्रिशूल की भांति हमारे त्रीलक्ष्य (धर्म, अर्थ और मोक्ष) के साथ मनुष्य के मूलाधार चक्र पर सक्रिय बल है। मूलाधार में पूर्व जन्मों के कर्म और समस्त अच्छे-बुरे अनुभव संचित रहते हैं। यह चक्र कर्म सिद्धांत के अनुसार यह चक्र प्राणी का प्रारब्ध निर्धारित करता है, जो अनुत्रिक के आधार में स्थित तंत्र और योग…

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शारदीय नवरात्रि 2024: पढ़िए देवी सती की पौराणिक कथा, जानिए 52 शक्ति पीठ कहां-कहां हैं, वाराणसी से श्रीलंका तक होती है भगवती की पूजा

पंडित लोकनाथ शास्त्री पौराणिक कथा के अनुसार, माँ सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति ने कनखल (हरिद्वार) में बृहस्पति सर्व नामक यज्ञ का आयोजन किया था। इस अवसर पर उन्होंने सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा था। लेकिन उन्होंने अपनी पुत्री सती और अपने दामाद शंकर जी को नहीं बुलाया था। लेकिन माँ सती शिव जी के लाख मना करने बाद बिन बुलाये अपने पिता के घर इस आयोजन के निमित्त आ गईं। जब माँ सती ने अपने पति दक्ष से यह पूछा कि आपने सभी को इस यज्ञ के लिए…

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काम का दबाव और हमारे जज्बात: बिना दबाव लिए पढ़िए, जिंदगी की रेस में दौड़ते रहिए

व्यंग्य आजकल के ऑफिस का माहौल ऐसा हो गया है कि अगर कोई दिन बिना काम के दबाव के बीत जाए, तो लगता है कि शायद कुछ गड़बड़ है। फिलहाल मेरे एक साथी का किस्सा, उन्हीं की शब्दों में- एक दिन सुबह-सुबह ऑफिस पहुंचा और देखा कि बॉस की शक्ल कुछ ज्यादा ही चमक रही है। मैंने सोचा, “आज कुछ खास काम होगा,” लेकिन बॉस ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे, आज आप पर कोई काम का दबाव नहीं है।” मैंने आश्चर्य से सोचा, “क्या यह वही बॉस है जो बिना…

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पितृपक्ष में तर्पण और पिंडदान का महत्व: पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का प्रतीक, पूर्वज हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा

शंकरनाथ पांडेय वाराणसी: पितृपक्ष हिंदू धर्म का एक विशेष समय है, जो श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। इस अवधि में तर्पण, पिंडदान और अन्य दान करना अत्यधिक पुण्यकारी माना जाता है। इस वर्ष पितृपक्ष की अवधि के दौरान लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान किया, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अनूठा उदाहरण सामने आता है। तर्पण और पिंडदान का महत्व हिंदू धर्म के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों…

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2 अक्टूबर: भारत और विश्व के इतिहास में विशेष महत्व, इस दिन की भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और राजनीति में अहम भूमिका

2 अक्टूबर का दिन भारत और विश्व के इतिहास में खास स्थान रखता है। यह दिन महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय राजनीति में अहम भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा, यह दिन विश्व भर में कई ऐतिहासिक घटनाओं और प्रसिद्ध व्यक्तियों के जन्म के कारण भी महत्वपूर्ण है। भारत में 2 अक्टूबर विश्व में 2 अक्टूबर की प्रमुख घटनाएं अन्य प्रमुख व्यक्तियों का जन्म 2 अक्टूबर का यह दिन महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री…

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रामनगर की रामलीला: श्रीराम ने जयंत की एक आंख फोड़ी, राक्षस विराज मारा गया

रामनगर, वाराणसी: प्रसिद्ध रामलीला के पंद्रहवें दिन एक अत्यधिक भावुक और प्रेरणादायक प्रसंग मंचित किया गया, जिसमें श्रीराम ने अपने दिव्य धैर्य, करुणा और न्याय का परिचय दिया। भरत के अयोध्या लौटने के बाद, श्रीराम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट से पंचवटी की ओर बढ़ रहे थे। वन में उनका स्वागत देवताओं और ऋषियों द्वारा हुआ, लेकिन इसी बीच एक अप्रत्याशित घटना ने सबका ध्यान खींचा। इंद्र के पुत्र जयंत ने कौवे का रूप धारण कर सीता माता के चरणों में चोंच मारी, जिससे उनका पैर लहूलुहान हो गया। यह दृश्य…

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शारदीय नवरात्रि 2024: जानिए कलश स्थापना से लगायत पूजा से संबंधित सभी जानकारी, इन बातों का ख्याल रखिएगा

पंडित लोकनाथ शास्त्री वाराणसी: हिन्दू धर्म में मां दुर्गा जी की पूजा किये जाने का विधान है। विशेष तौर से नवरात्रि के दिनों में दुर्गा मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि माता के आशीर्वाद से भक्तों के सभी प्रकार के दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। इसलिए साधारण व्यक्तियों से लेकर देव गणों ने भी मां का आशीर्वाद पाने के लिए उनकी सच्चे हृदय से आराधना की है। शास्त्रों में मां दुर्गा को आदि शक्ति और परब्रह्म कहकर पुकारा गया है। श्रीकृष्ण इस मां दुर्गा…

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रामनगर की रामलीला: रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई, भरत ने श्रीराम का खड़ाऊं सिंहासन पर स्थापित किया, खुद नंदीग्राम निवास

रामनगर, वाराणसी: ऐतिहासिक रामलीला में 14वें दिन का मंचन अद्वितीय भक्ति और समर्पण का प्रतीक बना। पौराणिक कथा के इस महत्त्वपूर्ण प्रसंग में श्रीराम के वनवास और भरत के त्याग का सजीव चित्रण हुआ। भरत, जिन्होंने अयोध्या के राजसिंहासन को त्यागकर श्रीराम के खड़ाऊं को ही राजा मान लिया, अपनी भक्ति और समर्पण से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ गए। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब श्रीराम वनवास के लिए निकले, तब भरत ने अयोध्या की राजगद्दी को स्वीकारने से मना कर दिया। उनका प्रेम और समर्पण ऐसा था…

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शारदीय नवरात्र: बुराई पर अच्छाई की जीत निश्चित, शक्ति की उपासना और धर्म की स्थापना का महापर्व

शारदीय नवरात्र, देवी दुर्गा की नौ शक्तियों की आराधना का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और इसे शक्ति की उपासना का सबसे पावन समय माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में भक्तगण उपवास रखते हैं, मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं, और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए आशीर्वाद…

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पितृपक्ष में दही खाना: परंपरा और मान्यताएं, खाने-पीने के कुछ नियम विशेष रूप से ध्यान देने योग्य

पितृपक्ष, जिसे श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण समय होता है जब लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं। इस अवधि में खाने-पीने के कुछ नियम और परंपराएं विशेष रूप से ध्यान देने योग्य होती हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख सवाल है- पितृपक्ष में दही खाना चाहिए या नहीं? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में सादा और सात्विक भोजन का पालन करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इस समय तामसिक और भारी भोजन…

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