दिल्ली धर्म-कर्म सबसे अलग 

जानिए इसके पीछे का रहस्य: पितृपक्ष में दाढ़ी और बाल क्यों नहीं बनवाए जाते हैं और नाखून काटने से परहेज क्यों किया जाता है?

भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं का विशेष महत्व है। इनमें से एक महत्वपूर्ण समय है पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने के लिए कई धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। यह समय विशेष रूप से पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए समर्पित होता है। पितृ पक्ष में कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है, जिनमें दाढ़ी और बाल न बनवाना तथा नाखून न काटना प्रमुख हैं। इन परंपराओं के पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक…

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29 सितंबर: भारत और विश्व के इतिहास में महत्वपूर्ण दिन, जानिए इस दिन हुआ किन महान हस्तियों का जन्म

29 सितंबर का दिन भारत और विश्व के इतिहास में खास स्थान रखता है। इस दिन न केवल अनेक ऐतिहासिक घटनाएँ घटीं, बल्कि कई मशहूर व्यक्तियों का जन्म भी हुआ, जिन्होंने समाज, विज्ञान, और कला के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आइए, इस खास दिन को विस्तार से जानें। भारत में 29 सितंबर की प्रमुख घटनाएं 29 सितंबर को जन्मे महान व्यक्ति 29 सितंबर की अन्य महत्वपूर्ण घटनाएँ निष्कर्ष 29 सितंबर का दिन इतिहास के पन्नों में अपनी विशेष जगह रखता है। इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएँ हुईं, जिन्होंने समाज,…

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उत्तर प्रदेश दिल्ली धर्म-कर्म वाराणसी सबसे अलग 

रामनगर की रामलीला: भरत और श्रीराम के मिलन ने छलकीं भक्तों की आंखें, बरसात से चतुरंगिणी सेना की सलामी पर असर

वाराणसी, रामनगर: विश्वविख्यात रामलीला का हर दृश्य जब मंचित होता है, तो वह केवल एक नाटक नहीं, बल्कि आस्था और पौराणिकता का जीवंत चित्रण बन जाता है। रामलीला के तेरहवें दिन जिस प्रकार से भरत और श्रीराम का मिलन हुआ, उसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। यह लीला केवल एक मंचन नहीं, बल्कि धर्म, प्रेम, और त्याग की अद्वितीय प्रस्तुति थी, जो दर्शकों की आस्था को और अधिक गहराई में ले जाती है। भरत का त्याग और लक्ष्मण का क्रोध, धर्म और प्रेम की पराकाष्ठा इस दृश्य में भरत…

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धर्म-कर्म पूर्वांचल वाराणसी सबसे अलग 

शिवपुर की रामलीला: केवट की भक्ति और प्रभु श्रीराम की करुणा का अद्भुत संगम

संतोष पांडेय वाराणसी: शिवपुर की ऐतिहासिक रामलीला में शुक्रवार को भगवान श्रीराम और केवट के मिलन की लीला का अत्यंत भावपूर्ण मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को भक्ति और अध्यात्म की गहराइयों में डुबो दिया। इस लीला में न केवल श्रीराम की विनम्रता का चित्रण हुआ, बल्कि केवट की भक्ति और समर्पण ने भी सभी का मन मोह लिया। रामलीला मैदान से सटे रामभट्ट तालाब में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी को सरयू नदी पार कराने का दृश्य सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। जब प्रभु श्रीराम अपने…

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दिल्ली सबसे अलग सेहतमंद व्यंजन 

दाल-चावल: संपूर्ण पोषण का आसान और सस्ता स्रोत, इन विशेषताओं को जान रहे हैं?

दाल-चावल भारतीय रसोई का एक प्रमुख व्यंजन है, जिसे लगभग हर घर में पसंद किया जाता है। यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बहुत फायदेमंद है। दाल और चावल का संयोजन एक संपूर्ण भोजन माना जाता है, जो प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन, और खनिजों का बेहतरीन स्रोत है। यह सरल व्यंजन हर उम्र के लोगों के लिए लाभकारी है और कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। 1. संपूर्ण प्रोटीन का स्रोत चावल में पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट और दाल में मौजूद प्रोटीन मिलकर शरीर…

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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन: भगवान कृष्ण का जीवन: हर परिस्थिति में धर्म, धैर्य और प्रेम का संदेश

भगवान कृष्ण का जीवन हमें जीवन के हर पहलू में धर्म, प्रेम, और न्याय के सिद्धांतों का पालन करने का महत्वपूर्ण संदेश देता है। उनका जीवन सिर्फ अद्भुत चमत्कारों और महाकाव्य घटनाओं से भरा नहीं है, बल्कि गहरे दार्शनिक और नैतिक मूल्यों से भी ओत-प्रोत है, जो आज के दौर में भी हमें सिखाते हैं कि कैसे चुनौतियों का सामना करते हुए सच्चाई की राह पर चलना है। बचपन से संघर्ष और नेतृत्व का प्रतीक कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ, जब उनके मामा कंस ने उनके माता-पिता…

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रामनगर की रामलीला: श्रीराम को मना कर वापस लाने भरत चले चित्रकूट, भक्ति, त्याग और भाईचारे का अद्भुत उदाहरण

वाराणसी, रामनगर: रामलीला के ग्यारहवें दिन का प्रसंग हर बार की तरह इस वर्ष भी अत्यधिक भावुक और पौराणिक संदेश से भरा रहा। भरत का चित्रकूट यात्रा पर निकलना न केवल रामायण की कथा में गहराई और त्याग का परिचायक है, बल्कि यह संपूर्ण भारतीय संस्कृति में भातृ प्रेम और कर्तव्यनिष्ठा का आदर्श उदाहरण बन चुका है। भरत का त्याग और श्रीराम के प्रति उनकी निष्ठा भारतीय परिवार और समाज में आज भी प्रेरणा का स्रोत है। रामलीला के मंचन ने इस अध्याय को इतनी सजीवता से प्रस्तुत किया कि…

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मौजूदा दौर का इंसान: खबरें देखने में मजा कॉमेडी शो ज्यादा, खबर भी अब ‘हास्य व्यंग्य’

व्यंग्य इस दौरे-हाजिर के इंसान को देखकर अक्सर लगता है कि अगर शेक्सपीयर आज होते, तो वह “संपूर्ण दुनिया एक मंच है” की जगह “संपूर्ण दुनिया एक मोबाइल है” लिखते। हम इंसान मोबाइल के बिना वैसे ही अधूरे हैं, जैसे बिना दही के समोसा या बिना ऑक्सीजन के सांस। इस दौर में सबसे बड़ा युद्ध इंटरनेट की स्पीड से होता है, और हारने वाले अक्सर ‘रिचार्ज’ में शांति खोजते हैं। आजकल के लोग दिन में कम से कम दस बार ‘पॉजिटिव’ शब्द सुनते हैं। फिटनेस का भी नया मापदंड है-…

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पितृपक्ष में तांबे के बर्तन का महत्व: परंपरा और विज्ञान का संगम, जानिए पौराणिकता

पितृपक्ष, जिसे श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दू धर्म में पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए समर्पित पखवाड़ा है। इस दौरान विशेष रूप से तांबे के बर्तन का प्रयोग करना न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व भी छिपा है। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व हिंदू धर्म के अनुसार, तांबे को पवित्र धातु माना गया है और इसे सूर्य का प्रतीक माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान जब पूर्वजों को जल अर्पण किया जाता है, तो तांबे…

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28 सितंबर: भारत और विश्व के इतिहास की महत्वपूर्ण तारीख, इस दिन इन दिग्गज हस्तियों का जन्म हुआ

28 सितंबर का दिन इतिहास के पन्नों में कई महत्वपूर्ण घटनाओं और महान हस्तियों के जन्मदिन के लिए जाना जाता है। भारत और विश्व के इतिहास में इस दिन कई ऐसी घटनाएं घटित हुईं जिन्होंने आगे चलकर समाज और राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाए। भारत और विश्व की प्रमुख घटनाएं: इस दिन जन्मे महान लोग: अन्य प्रसिद्ध हस्तियां: 28 सितंबर के ऐतिहासिक महत्व को समझते हुए, यह दिन हमें इतिहास के उन अनमोल पलों की याद दिलाता है जिन्होंने विश्व और भारत को आकार दिया। महान हस्तियों के जन्म ने…

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