धर्म-कर्म पूर्वांचल वाराणसी सबसे अलग 

शिवपुर की रामलीला: केवट की भक्ति और प्रभु श्रीराम की करुणा का अद्भुत संगम

संतोष पांडेय वाराणसी: शिवपुर की ऐतिहासिक रामलीला में शुक्रवार को भगवान श्रीराम और केवट के मिलन की लीला का अत्यंत भावपूर्ण मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को भक्ति और अध्यात्म की गहराइयों में डुबो दिया। इस लीला में न केवल श्रीराम की विनम्रता का चित्रण हुआ, बल्कि केवट की भक्ति और समर्पण ने भी सभी का मन मोह लिया। रामलीला मैदान से सटे रामभट्ट तालाब में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी को सरयू नदी पार कराने का दृश्य सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। जब प्रभु श्रीराम अपने…

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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन: भगवान कृष्ण का जीवन: हर परिस्थिति में धर्म, धैर्य और प्रेम का संदेश

भगवान कृष्ण का जीवन हमें जीवन के हर पहलू में धर्म, प्रेम, और न्याय के सिद्धांतों का पालन करने का महत्वपूर्ण संदेश देता है। उनका जीवन सिर्फ अद्भुत चमत्कारों और महाकाव्य घटनाओं से भरा नहीं है, बल्कि गहरे दार्शनिक और नैतिक मूल्यों से भी ओत-प्रोत है, जो आज के दौर में भी हमें सिखाते हैं कि कैसे चुनौतियों का सामना करते हुए सच्चाई की राह पर चलना है। बचपन से संघर्ष और नेतृत्व का प्रतीक कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ, जब उनके मामा कंस ने उनके माता-पिता…

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रामनगर की रामलीला: श्रीराम को मना कर वापस लाने भरत चले चित्रकूट, भक्ति, त्याग और भाईचारे का अद्भुत उदाहरण

वाराणसी, रामनगर: रामलीला के ग्यारहवें दिन का प्रसंग हर बार की तरह इस वर्ष भी अत्यधिक भावुक और पौराणिक संदेश से भरा रहा। भरत का चित्रकूट यात्रा पर निकलना न केवल रामायण की कथा में गहराई और त्याग का परिचायक है, बल्कि यह संपूर्ण भारतीय संस्कृति में भातृ प्रेम और कर्तव्यनिष्ठा का आदर्श उदाहरण बन चुका है। भरत का त्याग और श्रीराम के प्रति उनकी निष्ठा भारतीय परिवार और समाज में आज भी प्रेरणा का स्रोत है। रामलीला के मंचन ने इस अध्याय को इतनी सजीवता से प्रस्तुत किया कि…

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पितृपक्ष में तांबे के बर्तन का महत्व: परंपरा और विज्ञान का संगम, जानिए पौराणिकता

पितृपक्ष, जिसे श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दू धर्म में पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए समर्पित पखवाड़ा है। इस दौरान विशेष रूप से तांबे के बर्तन का प्रयोग करना न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व भी छिपा है। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व हिंदू धर्म के अनुसार, तांबे को पवित्र धातु माना गया है और इसे सूर्य का प्रतीक माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान जब पूर्वजों को जल अर्पण किया जाता है, तो तांबे…

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बाबा से लिया आशीर्वाद: विश्वनाथ धाम में बागेश्वर धाम सरकार के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने किया पूजन

वाराणसी: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शुक्रवार को काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से बाबा का पूजन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने गंगा महल कोठी में रात्रि विश्राम किया। सुबह मंगला आरती में शामिल होने के बाद काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। पूजन के बाद उन्होंने भक्तों से काशी की महत्ता पर चर्चा की और बाबा विश्वनाथ से आशीर्वाद लेकर आगे की यात्रा के लिए गया की ओर प्रस्थान किया। वहीं, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गुरुवार रात 2.30 बजे काशी के प्रसिद्ध…

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भोले की काशी में शक्ति आराधना की तैयारी: दुर्गा पूजा पंडालों से दिया जाएगा नारी सशक्तिकरण का संदेश

वाराणसी: शिव की नगरी काशी में शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्रि की तैयारियाँ ज़ोर-शोर से शुरू हो गई हैं। इस वर्ष नवरात्रि में दुर्गा पंडाल केवल भक्ति का केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का संदेश भी देंगे। योगी सरकार इस अवसर का उपयोग करते हुए ‘मिशन शक्ति’ के तहत नारी शक्ति को सशक्त बनाने के लिए दुर्गा पंडालों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता फैलाने की योजना बना रही है। महिला सुरक्षा पर विशेष जोर: योगी सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘मिशन शक्ति’ अभियान को…

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रामनगर की रामलीला: केवट की अनूठी भक्ति, बिना पांव पखारे प्रभु श्रीराम को नाव पर बिठाने से इंकार

केवट की अनूठी भक्ति: जब प्रभु को बिना पैर धोए नाव पर बिठाने से किया इंकार वाराणसी, रामनगर: रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। हर वर्ष अपने अनूठे पौराणिक प्रसंगों और सांस्कृतिक धरोहर के जीवंत चित्रण के कारण विश्वभर में यहां की रामलीला प्रसिद्ध है। यह केवल एक नाट्य मंचन नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है, जो हर साल राम के वनगमन, संघर्ष और विजय की गाथा को जीवंत करती है। केवट की भक्ति और विनम्रता इस…

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वास्तु के अनुसार सबसे शुभ पेड़: जानिए तुलसी का महत्व और लाभ

वास्तु शास्त्र में पेड़ों और पौधों का विशेष महत्व होता है, क्योंकि ये न केवल पर्यावरण को स्वच्छ और शुद्ध रखते हैं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का भी स्रोत होते हैं। कई पेड़-पौधे घर की सुख-समृद्धि, शांति और स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, लेकिन इनमें से तुलसी का पौधा सबसे शुभ और पवित्र माना जाता है। तुलसी का महत्व तुलसी को भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं में अत्यधिक पूजनीय माना गया है। इसे माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है, और इसकी पूजा से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास…

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पूर्वजों की आत्म शांति का समय: पितृपक्ष में इन पांच चीजों का दान करना माना जाता है अत्यंत शुभ

हिंदू धर्म में पितरों की तृप्ति और आशीर्वाद के लिए पितृपक्ष का विशेष महत्व है। यह 15 दिनों का समय (श्राद्ध पक्ष) पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनकी तृप्ति के लिए समर्पित होता है। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और दान का विशेष महत्व माना गया है। पितृपक्ष में दान का बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, और इसमें पांच विशेष वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं, इन पांच चीजों के बारे में जिनका दान पितृपक्ष में बेहद शुभ माना जाता है:…

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दर्शन के लिए लगी भक्तों की भीड़: बनारस पहुंचे बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

वाराणसी: बागेश्वर धाम सरकार के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री गुरुवार की भोर में अचानक बनारस पहुंचे, जिससे शहर में उत्साह की लहर दौड़ गई। वाराणसी के फूलपुर क्षेत्र स्थित ढोरा गांव में शास्त्री अपने शिष्य के घर सुबह करीब 4 बजे पहुंचे। उनके आगमन की सूचना मिलते ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन के लिए दौड़ पड़े। भक्तों की भीड़ पंडित धीरेंद्र शास्त्री की एक झलक पाने को बेताब दिखी। पूरा परिसर “बागेश्वर धाम सरकार” के जयकारों से गूंज उठा, और गांव का माहौल भक्तिमय हो गया। धीरेंद्र शास्त्री की…

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