पितृपक्ष में पिंडदान: पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और मोक्ष का मार्ग, वाराणसी और गया का विशेष महत्व
वाराणसी: पितृपक्ष हिन्दू धर्म का एक विशेष समय होता है, जब पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया जाता है। यह अवधि भाद्रपद पूर्णिमा से अश्विन अमावस्या तक, कुल 16 दिनों तक होती है, जिसे श्राद्ध पक्ष या महालय पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। पिंडदान का महत्व: हिन्दू धर्म में मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान, हमारे पूर्वजों की आत्माएं धरती पर आती हैं और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। पिंडदान, जिसमें चावल,…
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