रामनगर की रामलीला: रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई, भरत ने श्रीराम का खड़ाऊं सिंहासन पर स्थापित किया, खुद नंदीग्राम निवास
रामनगर, वाराणसी: ऐतिहासिक रामलीला में 14वें दिन का मंचन अद्वितीय भक्ति और समर्पण का प्रतीक बना। पौराणिक कथा के इस महत्त्वपूर्ण प्रसंग में श्रीराम के वनवास और भरत के त्याग का सजीव चित्रण हुआ। भरत, जिन्होंने अयोध्या के राजसिंहासन को त्यागकर श्रीराम के खड़ाऊं को ही राजा मान लिया, अपनी भक्ति और समर्पण से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ गए। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब श्रीराम वनवास के लिए निकले, तब भरत ने अयोध्या की राजगद्दी को स्वीकारने से मना कर दिया। उनका प्रेम और समर्पण ऐसा था…
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